Sunday, October 21, 2012

मही नदी और महीसागरसंगम तीर्थ | Mahi River and Mahi Saagar Sangam Teerth

Skand Puran, in Kumarika Khand ( कुमारिका खण्ड ), gives detailed information about this Holy River, awarding it the status of Best place of Pilgrimage. This chapter gives this river so much Significane that I was tempted to search the net to know the present status of such an important River of Puranic Times.

Skand Puran says
मालवा नामक देश से मही नदी उत्पन्न हुई है और दक्षिण समुन्द्र में जाकर मिलती है। उसके दोनों तट परम पुण्यमय तीर्थ हैं। फिर जहाँ सरिताओं के स्वामी समुद्र से उसका संगम हुआ है उसके विषय में तो कहना ही क्या है।
पूर्वकाल की बात है, अर्जुन तीर्थ यात्रा करते हुए दक्षिण समुन्द्र के तट पर यहाँ के पांच तीर्थों में स्नान करने के लिए आये. उनमें पहला "कुमारेश" है, जो मुनियोंको प्रिय है. दूसरा "स्त्म्भेश" तीर्थ है, जो सौभद्र मुनि का प्रिय है. तीसरा "व्र्क्रेश्वर" तीर्थ है, जो इंद्र पत्नी शचि को प्रिय लगता है. चौथा "महाकालेश्वर" तीर्थ है, जो राजा करन्ध्म को प्रिय है. इसी प्रकार पांचवा "सिद्धेश" नामक तीर्थ है, जो महाऋषि  भारद्वाज को प्रिय है.
Wiki says
Geologically, the Malwa Plateau generally refers to the volcanic upland south of the Vindhya Range. Politically and administratively, the historical Malwa region includes districts of western Madhya Pradesh and parts of south-eastern Rajasthan. ( Source Link )
Mahi River, stream in western India. It rises in the western Vindhya Range, just south of Sardarpur, and flows northward through Madhya Pradesh state. Turning northwest, it enters Rajasthan state and then turns southwest to flow through Gujarat state and enter the sea by a wide estuary past Khambhat after about a 360-mile (580-km) course. The silt brought down by the Mahi has contributed to the shallowing of the Gulf of Khambhat and the abandonment of its once-prosperous ports. The riverbed lies considerably lower than the land level and is of little use for irrigation. ( Source Link )

I found the Mahi River and the Stambheshwar Temple at the bay of Cambay where Mahi River merges with the Arabian Sea. Here's the Puranic History and Significance of Mahi River as mentioned in the Skand Puran.

The following text is taken from Kumarika Khand of Skand Puran, Chapter 10. In this chapter the King Indradyuman and his friends wished to know about a single place of pilgrimage that can provide Salvation. Shri Naarad Muni suggests them to approach Saint Sanvart ( संवर्त मुनि ) for their answers. After meeting Saint Sanvart, King Indradyuman asks the Saint...

 वे बोले - महामुने! हम आपकी शरण में आयें हैं। कृपया हमें ऐसा कोई उपाय बताएं, जिससे हम आपके अनुग्रह से मोक्ष प्राप्त कर लें। जिस तीर्थ में जाकर मनुष्य सब तीर्थों का फल प्राप्त कर लेता है, उसका नाम बतलाये, जिससे हम सब लोग जाकर वहां रहें।

संवर्त ने कहा - स्वामिकार्तिकेय तथा नव दुर्गाओं को नमस्कार करके मैं तुम लोगों को सर्वोत्तम तीर्थ का परिचय देता हूँ। उस तीर्थ का नाम है -- महीसागरसंगम। ये परम बुद्धिमान नृपक्ष्रेष्ठ इन्द्रद्युम्न जब यहाँ यज्ञ करते थे तब इनके द्वारा यह पृथ्वी दो अंगुल ऊंची कर दी गयी थी। उस समय जैसे गीले काठ के तपने पर उस से पानी चूता है, उसी प्रकार यज्ञाग्नि द्वारा तपती हुई पृथ्वी से जल का स्त्रोत् टपकने लगा। उस जलराशि को समस्त देवताओं ने नमस्कार किया। वही मही नामक नदी है। पृथ्वी पर जो कोई भी तीर्थ है, उन सब के जल से उत्पन्न सार रूप मही नदी का जल मना गया है। मालवा नामक देश से मही नदी उत्पन्न हुई है और दक्षिण समुन्द्र में जाकर मिलती है। उसके दोनों तट परम पुण्यमय तीर्थ हैं। यह सबके लिए कल्याणमयी है। पहले तो मही नदी स्वयं ही सर्वतीर्थमय है। फिर जहाँ सरिताओं के स्वामी समुद्र से उसका संगम हुआ है उसके विषय में तो कहना ही क्या है। काशी, गंगा, कुरुक्षेत्र, नर्मदा, सरस्वती, तापी, पयोंणी, निर्विन्ध्या, चन्द्रभागा, इरावती, कावेरी, सरयू, गण्डकी, नैमिषारन्य, गया, गोदावरी, अरुणा, वरुणा, तथा अन्य जो बीस हजार छ: सौ नदियाँ इस पृथ्वी पर विद्द्यमान हैं, उन सब के सार तत्व से मही नदी का जल प्रकट हुआ बतलाया गया है। पृथ्वी के सब तीर्थों स्नान करने से जो फल मिलता है, वही महीसागरसंगम से भी प्राप्त होता है, ऐसा कहा गया है। स्वामिकार्तिकेय का भी इस विषय में ऐसा ही वचन है। यदि तुम लोग किसी एक स्थान में सभी तीर्थों का संयोग चाहते हो तो परम पूण्यमय महीसागरसंगम तीर्थ में जाओ।  

 Further Skand Puran mentions some important days ( तिथि ) and procedures for performing devotional services at Mahi Saagar Sangam Teerth...

महीसागरसंगम में किया हुआ स्नान, दान, जप, होम और विशेषतः पिण्डदान सब अक्षय होता है। पूर्णिमा और अमावस्या जो यहाँ किया हुआ स्नान, दान, और जप आदि सब कर्म फल देने वाला होता है। देवर्षि नारद ने पूर्वकाल में जब यहाँ स्थान निर्माण किया था उस समय ग्रहों ने आकर वरदान दिया था। शनि देव ने जो वरदान दिया था वह इस प्रकार है - ' जिस समय शनिवार के साथ अमावस्या हो, उस समय यहाँ स्नान, दानपूर्वक क्ष्राद्ध करें। यदि श्रावण मास के शनिवार को अमावस्या तिथि हो और दिन सूर्य की संक्रान्ति तथा व्यतीपात योग भी हो तो यह 'पुष्कर' नामक पर्व होता है। इसका महत्व सौ सूर्य ग्रहणों से भी अधिक है। उक्त सभी योगों का सम्बन्ध यदि किसी प्रकार से उपलब्ध हो जाये, तो उस दिन लोहे की शनि मूर्ती का और सोने की सूर्य मूर्ती का मही सागर संगम में विधि पूर्वक पूजन करना चाहिए। शनि के मन्त्रों से शनि का और सूर्य सम्बन्धी मन्त्रों से सूर्य का ध्यान करके सभी पापों की शांति के लिए भगवान सूर्य को अर्ध्य देना चाहिए। उस समय यहाँ का स्नान प्रयाग से भी अधिक है, दान कुरुक्षेत्र से भी बदकर है। महान पुण्यराशि सहायक हो तभी यह सब योग प्राप्त होता है। यहाँ किये हुए क्ष्राद्ध से पितरों को स्वर्ग में अक्षय तृप्ति प्राप्त होती है। जैसे गयाशिर पितरों के लिए परम तृप्तिदायक है, इसी प्रकार उससे भी अधिक पुण्य देने वाला यह महीसागरसंगम है।

~~: ॐ नम: शिवाय :~~

17 comments:

  1. Where is mahi sagar sangam teerth and all its temples mentioned in sakanda purana..?? Please reply..

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    1. It is Vasad and very near to vasad verakahdi at Gujarat

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  2. Where is mahi sagar sangam teerth and all its temples mentioned in sakanda purana..?? Please reply..

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    1. Mahi sagar tirh vadodara city se 20 km par hai aur ahmedabad se 80 km ki duri par hai... Ahemedabad se vadodara ki aur ate huve vasad naam ka gaon hai yahi par mahi sagar sangam tirh hai yaha vehra khadi namak gaon hai yahi mahi sagar sangam tirth hai...

      Hari om

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  3. This comment has been removed by the author.

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    1. Visit the following link for more information

      http://travel.sulekha.com/photo-blog-river-mahi-sagar-vehra-khadi_travelogue_3836

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  4. श्री आकर्षण जी महाराज
    स्कन्द पुराण प्रवक्ता
    मो 9827806768 7376050207

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  5. श्री आकर्षण जी महाराज
    स्कन्द पुराण प्रवक्ता
    मो 9827806768 7376050207

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  6. माही नदी के किनारे कलेश्वरी दधि पट्टन और गलतेश्वर 3 तीर्थ पंचमहाल जिले के अंदर आते हैं जहां कलेश्वरी के प्राचीन अवशेष दधि पट्टन पूरा दबा हुआ प्राचीन नगर और गलतेश्वर का परमार कालीन मंदिर बहुत ही अद्भुत है

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  7. This place name kavi kamboi in Gujarat Yaha par hi barbarik NE tapsya karke divyastro ko paya thA

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  8. Yeh bahut he romanchak prakeran hai jo skandhpuran main aya hai. Mere man main yehan jane ki tivra ichcha jagrit hui hai. Bhagwan isko avasya pura kerenge.🙏🙏🙏🙏

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  9. संकध पुराण में भी इसका महात्यम बताया गया है। ओम् नमः शिवाय।

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  10. What about pratigneswar,kapaleswar,kumareswara,stambeswar,siddeswara,barkeswara,mahakaleswar.

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  11. Pl enlighten about these places where are they

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  12. I wish to visit mahisagar sangam.. Please it's a request if you can provide me the information during which month and day is the best to have the blessings of mahisagar sangam tirth... Which time is best... Which month is best.. Please provide information...

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