शिव पुराण >
विद्येश्वर संहिता > अध्याय २५ >
सूतजी कहते हैं – महाप्राज्ञ ! महामते ! शिवरूप शौनक ! अब मैं संक्षेप से
रुद्राक्ष का महात्म्य बता रहा हूँ, सुनों. रुद्राक्ष शिव का भुत प्रिय है. इसे
परम पावन समझना चाहिए. सुद्राक्ष के दर्शन से, स्पर्श से तथा उस पर जप करने से वह
समस्त पापों का अपहरण करने वाला माना गया है. मुने ! पूर्वकाल में परमात्मा शिव ने
समस्त लोकों का उपकार करने के लिए देवी पार्वती के सामने रुद्राक्ष की महिमा का
वर्णन किया था.

