पूर्वकाल की बात है, अर्जुन तीर्थ यात्रा करते हुए दक्षिण समुन्द्र के तट पर यहाँ के पांच तीर्थों में स्नान करने के लिए आये. इन तीर्थों को भी के मारे सभी तपस्वी लोग छोड़ चुके थे और दूसरों को भी वहां जाने से मन करते थे. उनमें पहला "कुमारेश" है, जो मुनियोंको प्रिय है. दूसरा "स्त्म्भेश" तीर्थ है, जो सौभद्र मुनि का प्रिय है. तीसरा "व्र्क्रेश्वर" तीर्थ है, जो इंद्र पत्नी शचि को प्रिय लगता है. चौथा "महाकालेश्वर" तीर्थ है, जो राजा करन्ध्म को प्रिय है. इसी प्रकार पांचवा "सिद्धेश" नामक तीर्थ है, जो महाऋषि भारद्वाज को प्रिय है. अर्जुन ने इन पाँचों तीर्थों का दर्शन किया जिन्हें तपस्वियों ने त्याग दिया था. अर्जुन ने नारद आदि महा ऋषियों का दर्शन करके उनसे पूछा - महात्माओं ! ये तीर्थ तो बड़े ही सुंदर और अद्भुत प्रभाव से युक्त हैं, तो बभी ब्रह्म वादी ऋषियों ने सदा के लिए इन का परित्याग क्यों कर दिया ?